Monday, January 9, 2017

Meri mohabbat hai woh shayari


मेरी मोहब्बत है वो कोई मज़बूरी तो नही,
वो मुझे चाहे या मिल जाये, जरूरी तो नही,
ये कुछ कम है कि बसा है मेरी साँसों में वो,
सामने हो मेरी आँखों के जरूरी तो नही...!!!

If he's not in love with my helplessness,
Whether or should I get it, not so important,
These low that they settle in my breath,
Not so important to be in front of my eyes ... !!!