Gham Shayari 2017 in Hindi



महफ़िल में हँसना हमारा मिजाज बन गया....!!!
तन्हाई में रोना एक राज बन गया....!!!
दिल के दर्द को चेहरे से जाहिर न होने दिया....!!!
बस यही जिंदगी जीने का अंदाज बन गया....!!!



जब भी करीब आता हूँ बताने के किये....!!!
जिंदगी दूर रखती हैं सताने के लिये....!!!
महफ़िलों की शान न समझना मुझे....!!!
मैं तो अक्सर हँसता हूँ गम छुपाने के लिये....!!!



इलाही उनके हिस्से का भी गम मुझको अता कर दे....!!!
कि उन मासूम आंखों में नमी देखी नहीं जाती....!!!

चाहत तो हर किसी की पूरी नहीं होती....!!!
ग़मों के बिना जिन्दगी आशा नहीं होती....!!!

कुछ लोग तो बीच मे ही साथ छोड़ देते हैं....!!!
पर बिना किसी के ज़िंदगी अधूरी नहीं होती....!!!



चाहा था मुक्कमल हो मेरे गम की कहानी....!!!
मैं लिख ना सका कुछ भी....!!! तेरे नाम से आगे....!!!



और कोई गम नहीं एक तेरी जुदाई के सिवा....!!!
मेरे हिस्से में क्या आया तन्हाई के सिवा....!!!
यूँ तो मिलन की रातें मिली बेशुमार....!!!
प्यार में सब कुछ मिला शहनाई के सिवा....!!!



राहत मिली ना दिल को....!!!
ना चैन-ओ-सकून मिला....!!!
बारिस भी होती रही रातभर....!!!
और कमबख्त दिल भी जलता रहा....!!!


निकल आते हैं आंसू हंसते हंसते
ये किस गम की कसक है हर खुशी में....!!!....!!!

किसे सुनाएँ अपने गम के
चन्द पन्नो के किस्से....!!!....!!!....!!!
यहाँ तो हर शख्स
भरी किताब लिए बैठा है l



गम तो है हर एक को....!!! मगर हौंसला है जुदा- जुदा....!!!
कोई टूट कर बिखर गया कोई मुस्कुरा के चल दिया ....!!!


शायरों की बस्ती में कदम रखा तो जाना....!!!
गमों की महफिल भी कमाल जमती है....!!!



मेरे ग़म ने होश उनके भी खो दिए....!!!....!!!....!!!
वो समझाते समझाते खुद ही रो दिए....!!!




वो सूरज की तरह आग उगलते रहे....!!!
हम मुसाफिर सफ़र पे ही चलते रहे....!!!
वो बीते वक़्त थे....!!! उन्हें आना न था....!!!
हम सारी रात करवट बदलते रहे....!!!


ऐसा नहीं के तेरे बाद अहल-ए-करम नहीं मिले....!!!
तुझ सा नहीं मिला कोई....!!! लोग तो कम नहीं मिले....!!!
एक तेरी जुदाई के दर्द की बात और है....!!!
जिनको न सह सके ये दिल....!!! ऐसे तो गम नहीं मिले....!!!


तेरी हालत से लगता है
तेरा अपना था कोई....!!!
वरना....!!!....!!!....!!!
इतनी सादगी से बरबाद
कोई गैर नहीं करता ....!!!


लोग पढ़ लेते है आँखों से मेरे दिल की बात....!!!....!!!....!!!
अब मुझसे तेरे गम की हिफाजत नहीं होती ....!!!


हमें कोई ग़म नहीं था ग़म-ए-आशिक़ी से पहले....!!!
न थी दुश्मनी किसी से तेरी दोस्ती से पहले....!!!
है ये मेरी बदनसीबी तेरा क्या कुसूर इसमें....!!!
तेरे ग़म ने मार डाला मुझे ज़िन्दग़ी से पहले....!!!



माँगने से मिल सकती नहीं हमें एक भी ख़ुशी....!!!
पाये हैं लाख रंज तमन्ना किये बगैर....!!!....!!!....!!!....!!!

बदन में आग सी है चेहरा गुलाब जैसा है....!!!
कि ज़हर-ए-ग़म का नशा भी शराब जैसा है....!!!
इसे कभी कोई देखे कोई पढ़े तो सही....!!!
दिल आइना है तो चेहरा किताब जैसा है....!!!



ये कैसा सिलसिला है....!!! तेरे और मेरे दरमियाँ....!!!
फ़ासले भी बहुत हैं और मोहब्बत भी....!!!