शायरी मोहब्बत@mohabbat



  1. अपना तो आशिकी का किस्सा-ए-मुख्तसर है,
  2. हम जा मिले खुदा से दिलबर बदल-बदल कर।

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  4. अपनी कमजर्फी का गम है और काई गम नहीं,
  5. दिल से तेरा गम न संभला, मुझको है बस ये मलाल।

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  7. अपनी गली में मुझको न कर दफ्न बादे-कत्ल,
  8. मेरे पते से खल्क को क्यों तेरा घर मिले।

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  10. अपनी नजर से तूने हमें क्या गिरा दिया,
  11. सारे जहाँ के दिल से, नजर से गिरा दिया।

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  13. अपनी बर्बादियों का रंज नहीं लेकिन,
  14. तेरी तन्हाइयों का क्या होगा।

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  16. अपनी मख्मूर निगाहों को न दो इज्ने-खिराम,
  17. बढ़ गई और अगर प्यास तो फिर क्या होगा।

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  19.  
  20. अपनी रूसवाई का गम था जब हमें, वो दिन गये,
  21. अब तो यह गम है कि ऐसी फिर न रूसवाई हुई।

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  23. अपने मरने का गम नहीं लेकिन,
  24. हाय तुमसे जुदाई होती है।

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  26. अपने हाथों की लकीरों में बसा लो मुझको,
  27. मैं हूँ तेरा तो नसीब अपना बना लो मुझको।
  28. मुझसे तू पूछने आया है वफा के मायने,
  29. यह तेरी सादादिली मार न डाले मुझको।
  30. खुद को मैं कहीं बाँट न लूँ दामन – दामन,
  31. कर दिया तूने अगर मेरे हवाले मुझको।

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  33. अपने-अपने हौसले,अपने तलब की बात है,
  34. चुन लिया हमने तुम्हें सारा जहाँ रहने दिया।

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  37. अब करके फरामोश तो नाशाद करोगे,
  38. पर हम जो न होंगे तो बहुत याद करोंगे।

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  40. अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख्वाबों में मिलें ,
  41. जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें ।

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  43. अब क्या करूँ तलाश किसी कारवां को मैं,
  44. गुम हो गया हूँ पाके तेरे आस्ताँ को मैं।

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  46. अब जाके आरजू का मुकम्मल हुआ है नक्श,
  47. सब मानने लगे हैं कि मैं दीवाना हो गया।

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  49. अब तक न खबर थी, मुझे उजड़े हुए घर की,
  50. तुम आए तो घर बेसरोसामां नजर आया।


  51. ****************************


  52. अब बुझा दो ये सिसकते हुए यादों के चराग,
  53. इनसे कब हिज्र की रातों में उजाला होगा।

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  55. अब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें,
  56. कुछ दर्द तो कलेजे से लगाने के लिए हैं।
  57. यह इल्म का सौदा, ये रिसाले, ये किताबें,
  58. इक शख्स की यादों को भुलाने के लिए है।

  59. ****************************


  60. अभी तो दिल में हल्की-सी कसक मालूम होती है,
  61. बहुत मुमकिन है कल इसका मुहब्बत नाम हो जाये।

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  63. 'अर्श' पहले यह शिकायत थी खफा होता है वह,
  64. अब यह शिकवा है कि वह जालिम खफा होता नहीं।

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  66. अलग बैठे थे फिर भी आँख साकी की पड़ी मुझ पर,
  67. अगर है तिश्नगी कामिल तो पैमाने भी आयेंगे।

  68. अश्क बनकर आई हैं वह इल्तिजाएं चश्म तक,
  69. जिनको कहने के लिए होठों पै गोयाई नहीं।

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  71. आंखों ने जरे-जर्रे पर सिज्दे लुटाये हैं,
  72. क्या जाने, जा छुपा मेरा पर्दानशीं कहाँ।

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  74. आ मैं तुझे बता दूँ, राजे-गमे-मुहब्बत,
  75. एहसासे-आरजू ही, तकमीले-आरजू है।

  76. आ कि तुझ बिन इस तरह ऐ दोस्त घबराता हूँ मैं,
  77. जैसे हर शै में किसी शै की कमी पाता हूँ मैं।

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  79.  
  80. आ कि तुझ बिन कम हुआ जाता है लुत्फे-जिन्दगी,
  81. टिमटिमाता है चरागे - जिन्दगी तेरे बगैर।

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  83. आइना हो जाये मेरा इश्क उसके हुस्न का,
  84. क्या मजा हो दर्द गर खुद ही दवा देने लगे।

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  86. आग थे इब्तिदा- ए - इश्क में हम,
  87. अब जो हैं खाक, इन्तिहा है यह।

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  89. आगे खुदा ही जाने अंजामे - इश्क क्या हो,
  90. जब ऐ 'शकील' अपना यह हाल है अभी से।

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  92. आज कैसी हवा चली ऐ 'फिराक',
  93. आख बेइख्तियार भर आई।

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  95.  
  96. आज वो मेहरबाँ से लगते हैं,
  97. कोई वादा वफा न हो जाये।
  98.  

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  100. आते-आते आयेगा उनको खयाल,
  101. जाते - जाते बेखयाली जायेगी।

  102. ****************************

  103. अगर अपने को फितरत का यह इंसां राजदाँ कर ले,
  104. हर इक जर्रे से पैदा बेतकल्लुफ सौ जहां कर।

  105. ****************************

  106. अगर दर्दे-मुहब्बत से न इन्साँ आशना होता,
  107. न मरने का अलम होता, न जीने का मजा होता।

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  109.  
  110. अजब आरजू है, अनोखी अदा है,
  111. तुझी से तुझे माँगना चाहता हूँ।

  112. ****************************

  113. अजल को दोष दें, तकदीर को रोयें, मुझे कोसें 
  114. मेरे कातिल का चर्चा क्यों है मेरे सोगवारों में।

  115. ****************************

  116. अजाबे-जां है खुदा जाने क्यों यह आजादी,
  117. सुकून था जो कफस में वह आशियां में नहीं।

  118. ****************************

  119. अदा निगाहों से होता है फर्जे-गोयाई,
  120. जुबां की हद से जब शौके-बयां गुजरता है।

  121. ****************************


  122. अनगिनत लोगों ने दुनिया में मुहब्बत की है,
  123. कौन कहता है कि सादिक न थे जज्बे उनके,
  124. लेकिन उनके लिए तश्हीर का सामान नहीं,
  125. क्योंकि ये लोग भी अपनी तरह मुफलिस थे।

  126. ****************************

  127. 'अनीस' आसाँ नहीं आबाद करना घर मुहब्बत का,
  128. यह उनका काम है जो जिन्दगी बरबाद करते हैं।

  129. ****************************


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