नजरों को तेरे प्यार shayari 2018


गुलाब के फूल को हम कमल बना देते, 
आपकी एक अदा पर कई गजल बना देते, 
आप ही हम पर मरती नहीं... वरना,
आपके घर के सामने ताजमहल बना देते..!!!


अच्छा सुनो ना...!!
जरुरी नहीं हर बार शब्द ही हों...!!
कभी ऐसा भी हो 
कि मैं सोचूं... और तुम समझ लो...!!!


दिन रात हम वो हर काम लिख लेते हैं, 
तेरी याद में गुजरी हर शाम लिख लेते हैं, 
तुझे देखे बिना इक पल भी कटता नहीं, 
अकेले में हथेली पे तेरा नाम लिख लेते हैं....!!


खुशियों की दामन में आँसू गिराकर तो देखिये, 
ये रिश्ता कितना सच्चा है आजमा कर तो देखिये, 
आपके रूठने से क्या होगी मेरे दिल की हालत, 
किसी आइने पर पत्थर गिराकर तो देखिये...!!!


उदास आपको देखने से पहले ये आँखे न रहें, 
खफा हो आप हमसे तो ये हमारी साँसें न रहें, 
अगर भूले से भी ग़म दिए हमने आपको, 
आपकी जिंदगी में हम क्या हमारी यादें भी न रहें..!!!


मुझे इश्तिहार सी लगती हैं, 
ये मोहब्बतों की कहानियाँ 
जो कहा नहीं, वो सुना करो, 
जो सुना नहीं, वो कहा करो...!!!


रग-रग में इस तरह से समा कर चले गये, 
जैसे मुझ ही को मुझसे चुराकर चले गये, 
आये थे मेरे दिल की प्यास बुझाने के वास्ते, 
इक आग सी वो और लगा कर चले गये...!!!


माना कि तुम जीते हो ज़माने के लिये, 
एक बार जी के तो देखो हमारे लिये, 
दिल की क्या औकात आपके सामने, 
हम तो जान भी दे देंगे आपको पाने के लिये..!!!



आसमान पे चाँद जल रहा होगा, 
किसी का दिल मचल रहा होगा, 
उफ़ ये मेरे पैरों में चुभन कैसी है, 
जरूर वो काँटों पर चल रहा होगा..!!!



तपती दोपहरी, गरम रेत पर...!!
ठंडे पानी की बूँदों जैसा काम कर गई...!!
तेरी आवाज़ जो कल सुनी मैंने...!!!

नजरों को तेरे प्यार से इंकार नहीं है, 
अब मुझे किसी और का इंतज़ार नहीं है, 
खामोश अगर हूँ मैं तो ये वजूद है मेरा,
तुम ये न समझना कि तुमसे प्यार नहीं है...!!!



तेरे शहर में आ कर बेनाम से हो गए, 
तेरी चाहत में अपनी मुस्कान ही खो गए, 
जो डूबे तेरी मोहब्बत में तो ऐसे डूबे, 
कि जैसे तेरी आशिक़ी के गुलाम ही हो गए...!!!

क्यूँ किसी से इतना प्यार हो जाता है, 
एक दिन का भी इंतजार दुश्वार हो जाता है, 
लगने लगते है अपने भी पराए, 
जब एक अजनबी पर ऐतबार हो जाता है...!!!



राह में संग चलूँ ये न गँवारा उसको, 
दूर रहकर वो करता है इशारे बहुत, 
नाम तेरा कभी आने न दिया होंठों पर, 
यूँ तेरे जिक्र से शेर सँवारे हैं बहुत...!!!


नजर से क्यूँ जलाते हो आग चाहत की, 
जलाकर क्यूँ बुझाते हो आग चाहत की, 
सर्द रातों में भी तपन का एहसास रहे, 
हवा देकर बढ़ाते हो आग चाहत की...!!


दिलबर की दिल-लगी में,
दिल अपना खो चुके हैं,...!!!
कल तक तो खुद के थे,
आज आप के हो चुके हैं...!!!